समस्तीपुर जिले का कर्पूरी ग्राम आज इतिहास, विचार और सामाजिक चेतना का जीवंत केंद्र बन गया, जब भारत रत्न जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके स्मृति स्थल पर पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। तिरंगे के रंग, प्रार्थनाओं की गूंज और जननायक के विचारों से ओत-प्रोत माहौल ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति भवन परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में शामिल होकर मुख्यमंत्री ने जननायक के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित किए। यह दृश्य केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के उस विचारधारा को पुनः जीवित करने का प्रतीक था, जिसके लिए कर्पूरी ठाकुर जीवन भर संघर्ष करते रहे।
सामाजिक न्याय की जीवित मिसाल थे कर्पूरी ठाकुर
जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय की नींव रखने वाले अग्रदूत के रूप में याद किया जाता है। वे सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कर्पूरी ग्राम पहुंचना इस बात का संकेत था कि आज भी बिहार की राजनीति उनके आदर्शों से प्रेरणा ले रही है।
मुख्यमंत्री ने गोखुल-कर्पूरी-फुलेश्वरी महाविद्यालय जाकर जननायक की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया। यह वही शिक्षा स्थल है, जो कर्पूरी ठाकुर के उस सपने को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने शिक्षा को गरीब, वंचित और पिछड़े समाज तक पहुंचाने की कल्पना की थी।
संसद से समाज तक—विचारों की विरासत
इस अवसर पर जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर द्वारा लिखित पुस्तकों—‘संसद और मैं’ तथा ‘मेरे संसदीय स्वर’ का विमोचन भी किया गया। ये पुस्तकें न केवल संसदीय अनुभवों का दस्तावेज हैं, बल्कि उस राजनीतिक परंपरा का विस्तार हैं, जिसमें जनसेवा सर्वोपरि रही है।
जननायक की सोच आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम में उपस्थित
जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने एक स्वर में माना कि कर्पूरी ठाकुर का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सत्ता में रहते हुए भी सादगी, ईमानदारी और गरीबों के हक़ की राजनीति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
सम्मान की साक्षी बनी कर्पूरी ग्राम की धरती
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, जननायक कर्पूरी ठाकुर के परिवार के सदस्य, पूर्व बिहार सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। हर चेहरा इस बात का गवाह था कि जननायक केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचार थे—जो आज भी जीवित हैं। बताते चलें कि,
भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर कर्पूरी ग्राम में आयोजित यह कार्यक्रम महज श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानवीय गरिमा के संकल्प को दोहराने का अवसर था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि जननायक की विरासत आज भी बिहार की राजनीति और समाज का मार्गदर्शन कर रही है।
कर्पूरी ठाकुर अमर हैं—अपने विचारों, संघर्षों और सामाजिक न्याय की मशाल के साथ।